फरीदाबाद, 27 नवंबर ( धमीजा ) : दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 2 बड़े खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक़ गिरफ्तार आतंकियों ने फरीदाबाद में भी ठिकाना बना रखा था और फरीदाबाद से ही केमिकल भी खरीदे थे ।डॉ मुज्जमिल ने फरीदाबाद के फतेहपुर तगा और धौज में ही नहीं बल्कि खोरी जमालपुर गांव में भी एक ठिकाना किराए पर ले रखा था।
यहां पूर्व सरपंच जुम्मा का 3 बेडरूम, किचन, हॉल वाला मकान यह कहकर किराए पर लिया था कि कश्मीरी फलों का व्यापार करेंगे। इस मकान में मुजम्मिल कई बार डॉ. शाहीन सईद के साथ आया।
एनआईटी नेहरू ग्राउंड में बीआर साइंटिफिक एंड केमिकल्स शॉप पर छापेमारी
दूसरा खुलासा अमोनियम नाइट्रेट को लेकर है। जांच में पता चला है कि आतंकी मॉड्यूल ने फतेहपुरा तगा और धौज में विस्फोटक बनाने का सामान छिपाने से पहले इसे यूनिवर्सिटी के पास ही स्टोर करके रखा था। करीब 2540 किलो विस्फोटक अल-फलाह यूनिवर्सिटी से सटे खेतों में बने एक कमरे में करीब 12 दिन रखा रहा था। इसके बाद चोरी होने या किसी को पता चलने के डर से गांव फतहेपुर तगा में इमाम इश्तियाक के पुराने घर में शिफ्ट कर दिया था। यहीं तैयार विस्फोटक दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया।इसी को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार की दोपहर फरीदाबाद में एनआईटी नेहरू ग्राउंड में बीआर साइंटिफिक एंड केमिकल्स शॉप पर छापेमारी की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दुकान का मालिक लाल बाबू है, जो ऑथोराइज्ड डीलर है। उसके यहां से कालेजों और यूनिवसिर्टी सहित कई अस्पतालों की लैब में केमिकल सप्लाई किया जाता है।

जांच एजेंसी के पास जानकारी थी कि डॉ. मुजम्मिल ने यहीं से केमिकल खरीदा था, जिसको लेकर जांच एजेंसी ने रिकार्ड चेक किया है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने कुछ रिकार्ड कब्जे में भी लिया है, लेकिन इसकी किसी ने कोई पुष्टि नही की है।
NIA जांच में पता चला खोरी जमालपुर के पूर्व सरपंच का मकान किराए पर लिया था
NIA की जांच में पता चला है कि डॉ. मुजम्मिल शकील ने अप्रैल से लेकर जुलाई 2025 तक अल-फलाह यूनिवर्सिटी से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर तीन बेडरूम का मकान 8 हजार रुपए प्रति महीने के हिसाब से किराए पर लिया था। ये मकान गांव खोरी जमालपुर के पूर्व सरपंच जुम्मा का है। जुम्मा की रोड पर प्लास्टिक रॉ मटेरियल की फैक्ट्री है। इसी के ऊपर ये कमरे बने हुए हैं।
जुम्मा ने बताया कि डॉ. मुजम्मिल शकील ने उनसे कहा था कि वह कश्मीरी फलों का कारोबार यहां पर करना चाहता है। इसके लिए उनको ज्यादा जगह की जरूरत है। कश्मीर के फल मंगाकर वो यहां के बाजार में सप्लाई करेगा। लेकिन, लगभग ढाई महीने बाद उसने कमरा यह कह कर खाली कर दिया कि यहां पर गर्मी ज्यादा है।
जुम्मा ने NIA को बताया कि वह मुजम्मिल को पहले से नहीं जानते थे। उसके भतीजे की कैंसर के चलते तबीयत खराब थी, जिसको लेकर वह अल-फलाह अस्पताल में गए थे। अस्पताल में उनकी मुलाकात डॉ. मुजम्मिल से हुई थी। अस्पताल में ही उनकी मुलाकात डॉ. उमर नबी से हुई थी। इलाज के दौरान ज्यादा संपर्क मुजम्मिल से रहा था। इसके बाद दोनों की जान-पहचान अच्छी हो गई। जुलाई के महीने में उनके भतीजे की मौत हो गई। जुम्मा ने ये भी बताया कि मुजम्मिल कई बार उनके ऑफिस पर भी आया था।
